राज्य सूचना आयुक्त ने मुख्य विकास अधिकारी भदोही को किया तलब जवाब न देने पर ₹25000 जुर्माना भरने की चेतावनी!
सीडीओ कार्यालय की लापरवाही से मुख्य विकास अधिकारी भदोही की फजीहत!
भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा के मददगार गिरोह के काले कारनामों का पर्दाफाश!
गुंडागर्दी की कारस्तानी में शामिल है स्थानीय लेखपाल और तहसील प्रशासन!
मुख्य विकास अधिकारी भदोही द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद होगी कार्रवाई!
भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा के काले कारनामों का धीरे-धीरे हो रहा है पर्दाफाश!
मुख्य विकास अधिकारी भदोही जल्द करेंगे भू-माफिया के कुकर्मों का खुलासा!
राज्य सूचना आयोग की सख्ती से भदोही जिले में हड़कंप!
राज्य सूचना आयुक्त ने मुख्य विकास अधिकारी भदोही को उपस्थित होने के लिए दिया निर्देश भू-माफिया के तथाकथित स्कूलों के रिकॉर्ड की मांगी जानकारी!
जानकारी न देने वाले जन सूचना अधिकारी को सीधे किया गया तलब!
माफिया सरगना के साथ मिलकर भू-माफिया ने जमीनों एवं धन में की है हेरा फेरी!
हेरा-फेरी करके रिकॉर्ड को गायब करने की साजिश!
राज्य सूचना आयोग की सख्ती से सामने आएंगे धन की हेरा फेरी, कूटरचित दस्तावेज!
दिव्यांग दलित मल्लू के मरने के बाद न्याय मिलने की उम्मीद!
संयम भारत संवाददाता व्यूरो,भदोही, राज्य सूचना आयोग की सख्ती से मुख्य विकास अधिकारी भदोही के कार्यालय में हंगामा मच गया है। राज्य सूचना आयोग ने भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील में माफिया सरगना कमला शंकर मिश्रा के द्वारा माफिया से मिलकर धान में हेरी फेरी,चकबंदी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करके किसानों की जमीन हड़पे जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। राज्य सूचना आयोग ने मुख्य विकास अधिकारी भदोही को तलब करते हुए कहां है कि 15 दिन में के भीतर अभिलार्थी को एवं नियत तिथि पर आयोग को सूचना देने का निर्देश दिया है। राज्य सूचना आयुक्त ने चेतावनी दी है कि अगर नियत तिथि तक तक सूचना नहीं दिया तो मुख्य विकास अधिकारी भदोही के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और मुख्य विकास अधिकारी भदोही को 25000 ₹ का जुर्माना भरना पड़ेगा। इस आदेश के बाद अब पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद जग गई है। ज्ञानपुर तहसील का चर्चित भू-माफिया कमला शंकर के कुकर्मों का पर्दाफ़ाश होने लगा है। राज्य सूचना आयोग की सख्ती से अब धन एवं दस्तावेज की जानकारी सामने आने लगे हैं। मुख्य विकास अधिकारीभदोही /जन सूचना अधिकारी को राज्य सूचना आयोग ने निर्देश दिया है की वे अगली तारीख को स्वयं उपस्थित होकर समस्त कागज प्रस्तुत करें ताकि मामले का निसतारण किया जा सके। भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील का भूमाफिया कमला शंकर मिश्रा अपने गिरोह के साथ मिलकर सरकारी धनो में हेरा फेरी एवं भोले भाले किसानों की जमीन हड़प कर कब्जा कर लेता है और किसान इधर-उधर भटकते रह जाते हैं। इस तरह से इसने 20 सो बीघा जमीन पर अवैध कब्जा किया और अभी भी इसकी कार्रवाई जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा अपने गिरोह के साथ मिलकर लोगों की जमीनो पर कब्जा करना इसका पेशा है। कमला शंकर पहले ज्ञानपुर तहसील में लेखपाल था। लेखपाल पद के दौरान इसने अपने पद का दुरपयोग करते हुऎ सिफारिश और रिशवतखोरी के ऊपर अपने गांव में ही अपनी पोस्टिंग करा ली। जबकी नियम यह है की जो लेखपाल उसी गांव का है। उस गांव में उसकी पोस्टिंग नहीं हो सकती और गांव में पोस्टिंग कराने के बाद इसने गांव के किसानों की जमीनो मे बदलाव करके कई जमीनो को अपने नाम से दर्ज करवा दिया। यही नहीं ग्राम समाज की जमीन, पंचायत भवन की जमीन, जिला पंचायत की जमीन, बच्चों के खेलने के मैदान, सार्वजनिक तालब की जितनी भी सरकारी जमीन है। इटहरा गांव में जो थी। उन सारी सरकारी जमीनओं पर अवैध कब्जा करके इसने एक ही बिल्डिंग में तीन-तीन विद्यालयों की मान्यता ले रखी है। पहले इसने जमीनो पर अवैध कब्जा किया और फिर उन जमीनो पर मकान दुकान माल बनवा के माफिया गर्दी करने में लगा है। सूत्रों का कहना है की माफिया सरगना के साथ मिलकर इसने करोड़ों करोड़ रुपए की जमीनो को इधर से उधर किया है। माफिया सरगना के गिरोह का सदस्य होने के करण स्थानिया लोग उससे डरते हैं और इसी भय और आतंक का फायदा उठाकर यह लोगों की जमीनो पर कब्जा करता चला जा रहा है। इसके पास पहले बहुत ही मामूली जमीन थी। देखते ही देखते बीसों बीघा जमीन का मालिक बन गया इसने अपने कार्यकाल के दौरान तहसील ज्ञानपुर के रिकॉर्डों से गायब करवा दिया था। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री के सक्रियता के चलते इस भूमाफिया के काले करनामों का भंडाफोड़ होने लगा है। यही नहीं इसने दलित मल्लू की जमीन का फर्जी कागज तैयार करवा के उस बेचारे दलित की जमीन पर अवैध कब्जा कर दिया। कई साल तक दौड़ भाग करने के बाद दलित मल्लू दुनिया में नहीं रहा। लेकिन लोगों को उम्मीद है की सूचना आयोग की सख्ती के बाद किसानों की जमीन जो हडपी गई है। उसका कला सच सामने आएगा और दलित के परिजनों को उसके मरने के बाद न्याय मिल सकेगा।

