इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 28 विषयों को राहत, केवल 5 “दागदार” विषयों की पुनर्परीक्षा का होगा मूल्यांकन
“न्याय में संतुलन: बेदाग अभ्यर्थियों को राहत, दोषियों पर सख्ती”
“हाईकोर्ट ने कहा, जहां गड़बड़ी, वहीं कार्रवाई; सबको सज़ा नहीं”
विधि संवाददाता
प्रयागराज, संयम भारत, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 17 अप्रैल 2026 को एक अहम फैसले में यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा संशोधन किया। विशेष अपील संख्या 368/2026 में न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि सभी 33 विषयों की परीक्षा रद्द करना “असंगत” था, क्योंकि पेपर लीक का प्रभाव केवल सीमित विषयों तक ही पाया गया।यह मामला उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें 910 पदों के लिए 16 और 17 अप्रैल 2025 को परीक्षा कराई गई थी।
पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद आयोग और राज्य सरकार ने सभी विषयों की पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया था, जिससे हजारों अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बन गई थी।
जांच में यह सामने आया कि आयोग के एक संविदा कर्मचारी और कुछ अभ्यर्थियों की मिलीभगत से पेपर लीक हुआ था। हालांकि न्यायालय ने पाया कि इस लीक का प्रभाव केवल पांच विषयों—उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान—तक ही सीमित था। बाकी 28 विषयों में किसी भी प्रकार की अनियमितता के ठोस साक्ष्य एक वर्ष बाद भी सामने नहीं आए।न्यायालय ने “आनुपातिक कार्रवाई” के सिद्धांत को लागू करते हुए आदेश दिया कि 18 अप्रैल 2026 को होने वाली पुनर्परीक्षा तो होगी, लेकिन 28 बेदाग विषयों के अभ्यर्थियों की OMR शीट का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। केवल पांच दागदार विषयों के अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का ही मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि निष्पक्षता और न्याय दोनों सुनिश्चित हो सकें।
अदालत ने आगे निर्देश दिया कि अंतिम साक्षात्कार के लिए 28 विषयों के अभ्यर्थियों को अप्रैल 2025 की मूल परीक्षा के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जबकि पांच दागदार विषयों के लिए नई पुनर्परीक्षा के आधार पर चयन होगा। इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि न्यायालय दोषियों पर सख्ती के साथ-साथ निर्दोष अभ्यर्थियों के हितों की भी पूरी सुरक्षा करता है।
विशेष अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि कदाचार से अप्रभावित विषयों के उम्मीदवारों को अनुचित रूप से दंडित न किया जाए। विशेष अपील में उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राहुल श्रीपत और अधिवक्ता श्री इशिर श्रीपत ने किया।

