इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसफर और रिलीविंग आदेश निरस्त, आदेश का कराया गया अनुपालन।
विधि संवाददाता प्रयागराज, संयम भारत, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्थानांतरण विवाद में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के ट्रांसफर और रिलीविंग आदेश को निरस्त कर दिया। यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ द्वारा पारित किया गया, जिसमें न्यायालय ने संबंधित आदेशों की वैधता पर विचार करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए।मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रिषभ केसरवानी ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा, याचिका में यह बताया गया कि याचिकाकर्ता, जो उत्तर प्रदेश सिविल पुलिस में रिजर्व इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, का 04 दिसंबर 2025 को झांसी से पीएसी मुख्यालय, लखनऊ स्थानांतरण कर दिया गया था, हालांकि, स्थानांतरण आदेश के काफी समय बाद 05 जनवरी 2026 को रिलीविंग आदेश जारी किया गया, जिसे याचिकाकर्ता की ओर से नियमों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई।सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि शासन के प्रासंगिक दिशा-निर्देशों और पूर्व में पारित न्यायालयीन निर्णयों के अनुसार स्थानांतरण आदेश के बाद रिलीविंग निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाना आवश्यक है, याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि रिलीविंग में अनावश्यक विलंब होने के कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं रही।सभी पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि स्थानांतरण के बाद रिलीविंग आदेश जारी करने में देरी हुई है, जो निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है, इसके आधार पर न्यायालय ने 04 दिसंबर 2025 के स्थानांतरण आदेश तथा 05 जनवरी 2026 के रिलीविंग आदेश को निरस्त कर दिया, साथ ही संबंधित प्राधिकारी को यह स्वतंत्रता भी दी गई कि वे आगामी स्थानांतरण सत्र में विधि के अनुसार नया आदेश पारित कर सकते हैं। न्यायालय के इस आदेश के पश्चात संबंधित प्राधिकारी द्वारा आदेश का अनुपालन भी सुनिश्चित कर दिया गया है, इस प्रकार उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार मामले में आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई पूरी करते हुए पूर्व में जारी आदेशों को प्रभावहीन कर दिया गया, जिससे याचिकाकर्ता को न्यायालय से राहत प्राप्त हुई।

