दुनिया में एक केवल धर्म हिंदू है बाकी सब पंथ और उपासना है-डॉ रविंद्र नाथ शुक्ल
संयम भारत/दिनेश तिवारी प्रयागराज 30 नवंबर 2025.हिंदू धर्म संसार का अकेला धर्म है हिंदू शब्द हीन भावना से दूर हो जाए यह हिंदू शब्द कहलाता है सत्यम शिवम सुंदरम ही भारत की संस्कृति है यह बातें हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रविंद्र नाथ शुक्ला ने बनवासी आश्रम छात्रावास सुलेमसराय में हिंदी साहित्य भारती के प्रान्त और जिला पदाधिकारियों की बैठक के दौरान कहीं. पूर्व शिक्षा मंत्री रविंद्र नाथ शुक्ला ने कहा प्रकृति में धर्म को धारण करना ही भारत संस्कृति है, दुनिया में एक केवल धर्म हिंदू है बाकी सब पंथ और उपासना है. भारत की सरस्वती नदी ही सभ्यता है सिंधु घाटी सभ्यता भारत की नहीं है. परिवार नियोजन हिंदू ने अपनाया है. सदियों से धर्म और अधर्म की लड़ाई चलती रही हैं.वैदिक काल से देवता और दैत्य जन्म लेते थे आज भी देवता और दैत्य जन्म ले रहे हैं.अगर वैदिक सनातन धर्म, भारत वैभव, वर्ण व्यवस्था की मौलिक अवधारणा का अध्ययन हर भारत वासी का कर्तव्य हैं. हर परिवार को रामचरित मानस, गीता और भागवत कथा का अध्ययन करें तभी राष्ट्रवाद जीवित रहेगा. डॉ रविंद्र नाथ शुक्ला ने कहा हमें परिवार नियोजन को छोड़ना होगा नहीं तो 2040 तक में हम सब समाप्त हो जाएंगे. हिंदी साहित्य के प्रभाव व जन जागरण होने से ज्ञान का प्रकाश फैलेगा. सत्य की खोज में लगे रहना है संस्कार ही हमें आगे की ओर जीवित रखेंगा. बृहस्पति आगम में हिंदू शब्द प्राप्त हुआ है. 2019 से पहले गूगल में हिंदी का शब्द नहीं थे अब हर प्लेटफार्म पर हिंदी शब्द मिलेगा. संयुक्त राष्ट्र संघ में भी भारत से जाने वाला हर नेता अब हिंदी में ही संबोधन देते हैं. हिंदी साहित्य के जन जागरण के लिए हर भारतवासी को आगे आना होगा तभी एक सशक्त और विकसित भारत बनेगा इस मौके पर आचार्य विश्व पति शुक्ल, प्रभाकर त्रिपाठी अध्यक्ष काशी प्रांत, दिनेश तिवारी अध्यक्ष प्रयागराज, अभय मिश्रा,श्याम कृष्णा पांडे, अजय कुमार मिश्रा, डॉ. अंबुजा तिवारी, प्रज्ञा पांडे,दुर्ग विजय सिंह, कमल कौशल उपाध्याय, सत्येंद्र कुमार पाल, कृष्ण मोहन मिश्रा, जयप्रकाश गुप्ता, श्याम सिंह सेंगर, दिलीप कुमार तिवारी,श्याम सुंदर आदि ने विचार रखते हुए हिंदी साहित्य का जन जागरण करने का संकल्प लिया.

