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शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, राज्य सूचना आयोग के आदेश से भू-माफिया की करतूतें बेनकाब!

विशेष संवाददाता भदोही, संयम भारत, भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील में चर्चित भू-माफिया कमला शंकर मिश्र को बचाने के आरोप में शिक्षा विभाग घिरता नजर आ रहा है। राज्य सूचना आयुक्त के सख्त तेवरों के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। आयोग ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भदोही को निर्देश दिया है कि वे 15 दिन के भीतर अपीलार्थी को सही सूचना उपलब्ध कराएं। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में सूचना नहीं दी गई तो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के अंतर्गत ₹25,000 का अर्थदंड अधिरोपित किया जाएगा। राज्य सूचना आयुक्त ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का भी निर्देश दिया है।राज्य सूचना आयोग में हुई सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षा विभाग भू-माफिया को बचाने की कोशिश कर रहा है। अपीलार्थी के प्रतिनिधि ने बताया कि विभाग द्वारा दी गई सूचनाएं भ्रामक और असत्य हैं। इस पर राज्य सूचना आयुक्त ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। आयोग ने यह भी कहा कि सूचना देने में लापरवाही बरतने पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इस सख्त रुख से शिक्षा विभाग के अधिकारियों में अफरा-तफरी का माहौल है।सूत्रों के अनुसार, भू-माफिया कमला शंकर मिश्र पर आरोप है कि उसने कूटरचित दस्तावेजों और जाति परिवर्तन के जरिए दिव्यांग दलित मल्लू पुत्र स्व. शीतला चमार की जमीन हड़प ली। भू-माफिया ने मनबोध पुत्र माता बदल चमार को मनबोध पासी दर्शाते हुए दस्तावेजों में हेराफेरी की और ग्राम सभा की जमीन अपने नाम करवा ली। जबकि उच्च न्यायालय, राजस्व परिषद और शासनादेश के अनुसार, किसी भी ग्राम सभा की जमीन निजी विद्यालय या व्यक्ति को दिए जाने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद राजस्व और शिक्षा विभाग की मिलीभगत से यह कृत्य किया गया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है।पीड़ित दिव्यांग दलित मल्लू ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भदोही को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। पत्र में कहा गया कि भू-माफिया ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम से झूठे कागजात तैयार कर जमीन पर कब्जा कर लिया है। गांव सभा की खुली बैठक में भी यह तथ्य सामने आया कि मनबोध पुत्र माता बदल चमार ही थे, पासी नहीं। बावजूद इसके, विभागीय अधिकारियों ने सच्चाई छिपाने की कोशिश की। दुखद यह रहा कि न्याय न मिलने और लगातार मानसिक उत्पीड़न के चलते दिव्यांग दलित मल्लू की सदमे से मौत हो गई। राज्य सूचना आयोग की कार्रवाई के बाद अब उम्मीद जगी है कि भू-माफिया और उसके सहयोगियों पर सख्त कार्यवाही होगी तथा दलित परिवार को न्याय मिल सकेगा।

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