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भू माफिया की हेरा फेरी को छुपा रहा है प्रशासन

राज्य सूचना आयुक्त को नहीं दी जा रही है सही जानकारी!

जमीन चिन्हित करने के लिए भटक रहे हैं किसान!

भू माफिया को बचाने के लिए तहसील प्रशासन नहीं दे रहे हैं सही जानकारी!

भू माफिया कमला शंकर मिश्र को बचाने में लगा है तहसील प्रशासन!

उच्च न्यायालय के आदेश का ज्ञानपुर तहसील में कब होगा पालन?

भू माफिया कमला शंकर का कब हटेगा अवैध कब्जा?

हाईकोर्ट का आदेश: यूपी में अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई की हिदायत

सरकारी भूमि से 90 दिन में कब्जे हटाएं

संयम भारत संवाददाता

प्रयागराज, विधि संवाददाता। सूचना आयोग एवं न्यायालय के आदेश के बावजूद ज्ञानपुर तहसील के अधिकारी लोगों को सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। जिसकी वजह से भू माफिया कमला शंकर मिश्रा के काले कारनामों का ठीक से पर्दाफाश नहीं हो पा रहा है। भू माफिया कमला शंकर को बचाने के लिए अब सूचना आयुक्त ने कडा रुख अपना लिया है। इन लोगों के विरुद्ध फिर से सही जानकारी मांगी गई है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील में सारा काम हो रहा है। भू माफिया को बचाने के लिए तहसीलदार और परगना अधिकारी द्वारा सही सूचनाओं को राज्य सूचना आयोग को नहीं दी जा रही है। राज्य सूचना आयोग की सख्ती से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन भू माफिया कमला शंकर मिश्र को बचाने के लिए ज्ञानपुर तहसील प्रशासन के एसडीएम और तहसीलदार पूरी ताकत से जुट गए हैं। भ्रष्टाचारियों की इस हरकत चलते गरीब जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेशवासियों को सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने में उदासीन ग्राम प्रधान और लेखपाल के खिलाफ दीवानी अवमानना की कार्यवाही करने का अधिकार दिया है। यह कार्यवाही हाईकोर्ट में की जा सकेगी। साथ ही प्रदेश में सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण 90 दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील में पालन नहीं हो रहा है। ग्राम सभा की जमीन पर भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा ने अवैध कब्जा कर रखा है। अवैध कब्जा को हटाए जाने को लेकर ग्राम वासियों ने शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून के अनुसार कार्य करने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्यवाही की जाए। इस मामले में जीरो टारलेंस को नीति अपनाते हुए अतिक्रमण यथाशीघ्र हटाया जाना चाहिए। हिए। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने झांसी के मुन्नीलाल उर्फ हरिशरण की जनहित याचिका निस्तारित करते हुए दिया है।

कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमणकारियों पर हर्जाना लगाएं और यदि जरूरी हो तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्यवाही करें। कोर्ट पाहले ही मान चुकी है कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हैं और इनका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों (जैसे फेरी लगाना या कार क्लिनिक चलाना) या निजी ढांचे के लिए नहीं किया जा सकता, इसलिए संबंधित अधिकारी इन्हें बाधाओं से मुक्त रखें।

कोर्ट ने झांसी के डीएम को निर्देश दिया कि एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गाँहत कर याची की शिकायत की जांच कराएं। यदि राजस्व अभिलेखों में दमें सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण
कोर्ट ने कहा, अतिक्रमणकारियों पर हर्जाना लगाएं

जाने निर्देश दिया है।

ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत संपत्ति का संरक्षक है। नियमानुसार वह सूचना नहीं दे रहा है तो उसके खिलाफ डीएम कार्रवाई करें।

पुलिस अधिकारी अधिकारी अतिक्रमण हटाने में राजस्व अफसरों को पूर्ण सहयोग देव शांति व्यवस्था बनाए रखें।

आयुक्त, डीएम समेत अन्य अफसर प्रति वर्ष अतिक्रमण हटाने और दोषी अधिकारियों पर की गई कार्रवाई से मुख्य सचिव को अवगत कराएंगे।

90 दिन में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही तहखेलदार ने नहीं को तो कदाकर माना जाएगा

जीएस के किसी सड़क पर कोई बाधा या अतिक्रमण है तो व्यक्ति गलत तरीके से कैद होने को मजबूर हो जाएगा और बिना रास्ता या सड़क, जीवन नर्क के समान है। इसलिए सड़क आवश्यक है क्योंकि यह व्यक्ति की ही नहीं, बल्कि समाज के व्यापक जनमानस की शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, सम्मान आदि को भी प्रभावित करती है। इसलिए रास्ते या सड़क पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।

बताया जाता है कि संबंधित हल्का लेखपाल के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए, जिसने सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण से इनकार करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। यह प्रक्रिया 90 दिनों की अवधि के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने इस बात पर इस बात पर पालकतम

संबंधित याचिकाओं से भरा है। कोर्ट ने सभी डीएम-एसडीएम को निर्देश दिया कि ऐसे लोगों के पर विभागीय कार्यवाही शुरू करें जो किसी अतिक्रमण के संबंध में संबंधित तहसीलदार को इस आदेश को आज की तिथि से प्रभावी करना होगा।

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