ट्रांसफर में देरी पड़ी भारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसफर और रिलीविंग आदेश किए रद्द, प्रशासन को दिया नया आदेश!!
इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, ट्रांसफर और रिलीविंग आदेश दोनों रद्द!!
अधिवक्ता ऋषभ केसरवानी की प्रभावी पैरवी रंग लाई, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसफर व रिलीविंग आदेश किए रद्द!!
विधि संवाददाता
प्रयागराज, माननीय न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने 4 दिसंबर 2025 के ट्रांसफर आदेश तथा 5 जनवरी 2026 के रिलीविंग आदेश को निरस्त कर दिया, यह आदेश रिट-ए नं० 1104/2026 में पारित किया गया।
मामले में याची, जो उत्तर प्रदेश सिविल पुलिस में रिजर्व इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे, जिनका स्थानांतरण झांसी से पीएसी मुख्यालय, लखनऊ कर दिया गया था। हालांकि, ट्रांसफर आदेश 4 दिसंबर 2025 को जारी हुआ, लेकिन उन्हें 5 जनवरी 2026 को कार्यमुक्त किया गया, जो शासनादेश में निर्धारित एक सप्ताह की समयसीमा से अधिक था।
याची की ओर से अधिवक्ता ऋषभ केसरवानी ने प्रभावी पैरवी करते हुए तर्क रखा कि शासनादेश दिनांक 06.05.2025 एवं परिपत्र 17.10.2025 के अनुसार स्थानांतरण के पश्चात एक सप्ताह के भीतर रिलीव किया जाना अनिवार्य है, देरी से जारी रिलीविंग आदेश विधि के विपरीत है।
न्यायालय ने पूर्व के निर्णयों, विशेषकर समान परिस्थितियों में पारित आदेशों का हवाला देते हुए माना कि अनावश्यक विलंब से जारी रिलीविंग आदेश विधिक रूप से टिकाऊ नहीं है, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक विवेकाधिकार भी नियमों और शासनादेशों के अधीन है।
अंततः न्यायालय ने ट्रांसफर व रिलीविंग दोनों आदेशों को निरस्त करते हुए संबंधित प्राधिकारी को आगामी ट्रांसफर सत्र में विधि अनुसार नया आदेश पारित करने की स्वतंत्रता प्रदान की, यह निर्णय सेवा कानून से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

