Breaking NewsIndiaLatestlegal NewsNewsPrayagraj news

मृतक आश्रित कोटे के तहत भर्ती दरोगाओं/इंस्पेक्टरों को मिलेगा ट्रेनिंग के पीरिएड का पूरा वेतन, हाईकोर्ट ने दिया आदेश प्रमोशन में भी जुड़ेगा ट्रेनिंग पीरिएड

संयम भारत संवाददाता

प्रयागराज / इलाहाबाद दिनांक 28 नवम्बर 2025
मृतक आश्रित कोटे के तहत भर्ती दरोगाओं/इंस्पेक्टरों को मिलेगा ट्रेनिंग के पीरिएड का पूरा वेतन, हाईकोर्ट ने दिया आदेश प्रमोशन में भी जुड़ेगा ट्रेनिंग पीरिएड।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जोन, नोएडा एन०सी०आर०, गाजियाबाद, मेरठ जोन, आगरा जोन, गोरखपुर जोन, कानपुर जोन, बरेली जोन एवं वाराणसी जोन के विभिन्न जनपदो में तैनात पुलिस इंस्पेक्टरों को उनकी ट्रेनिंग / प्रशिक्षण की अवधि सेवाओं में जोड़ते हुये वेतन वृद्धि प्रदान करने तथा सातवें वेतन आयोग के समस्त लाभ (पुर्नरीक्षित वेतन मान) एरियर के साथ देने तथा ट्रेनिंग / प्रशिक्षण की अवधि की सैलरी / वेतन देने के सम्बन्ध में, अपर पुलिस महानिदेशक, कार्मिक एवं स्थापना, डी०जी०पी० हेडक्वार्टर, उत्तर प्रदेश लखनऊ को निर्देशित किया है कि दो माह के अन्दर स्पेशल अपील नं० 169/2020 आलोक कुमार सिंह व अदर्स बनाम उ०प्र० सरकार व अन्य में पारित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 08.09.2021 के परिप्रेक्ष्य में कानून के तहत आदेश पारित करें।

उत्तर प्रदेश पुलिस के मृतक आश्रित कोटे के तहत वर्ष 2010-11 बैच में भर्ती दरोगाओं/ इंसपेक्टरों ने याचिका दाखिल कर उनकी ट्रेनिंग की अवधि की सैलरी देने के सम्बन्ध में एवं ट्रेनिंग की अवधि को उनकी सेवाओं में जोड़ते हुये वेतनवृद्धि प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में उच्च न्यायालय इलाहाबाद में गुहार लगायी है।

याचिका को अन्तिम रूप से निस्तारित करते हुये इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर पुलिस महानिदेशक, कार्मिक एवं स्थापना, डी०जी०पी० हेडक्वार्टर, उत्तर प्रदेश लखनऊ को निर्देशित किया है कि दो माह के अन्दर याचीगणों के प्रकरण में ट्रेनिंग की अवधि का वेतन दिये जाने के सम्बन्ध में तथा ट्रेनिंग / प्रशिक्षण की अवधि को सेवाओं में जोड़ते हुये वेतन वृद्धि प्रदान करने तथा सातवें वेतन आयोग के समस्त लाभ (पुर्नरीक्षित वेतन मान) एरियर के साथ देने के सम्बन्ध में नियम एवं कानून के तहत आदेश पारित करें, यह आदेश जस्टिस अजीत कुमार ने रामचन्द्र दूबे पुलिस इंस्पेक्टर एवं 60 अन्य पुलिस इंस्पेक्टरों द्वारा सामुहिक रूप से दाखिल की गई याचिका पर दिया है।

याचिका पर बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि याचियों के समकक्ष के अन्य दरोगाओं व इंस्पेक्टरों को ट्रेनिंग के पीरियड की अवधि के वेतन एवं भत्ते प्रदान किये गये है जबकि याचियों को प्रशिक्षण की अवधि में स्टाईपेण्ड प्रतिमाह प्रदान किया गया है एवं याचीगणों की ट्रेनिंग की अवधि को उनकी सेवाओं में नहीं जोड़ा गया है और न ही याचीगणों को अतिरिक्त वेतनवृद्धि ट्रेनिंग का पीरियड जोड़ते हुये प्रदान की गयी है।

याचियों के वरिष्ठ अधिवक्ता की दलील थी कि उक्त प्रकरण में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पेशल अपील आलोक कुमार सिंह व अन्य में यह विधि का सिद्धान्त प्रतिपादित किया है कि सीधी भर्ती एवं मृतक आश्रित कोटे के तहत भर्ती द्वारा चयनित दरोगाओं को भी ट्रेनिग की पीरियड की अवधि में वेतन / सैलरी दी जायेगी।

विशेष अपील में पारित आदेश दिनांक 08.09.2021 के विरुद्ध राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एस०एल०पी० योजित की थी जोकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गयी तत्पश्चात् उ०प्र० शासन लखनऊ के आदेश दिनांक 29-03-2022 द्वारा याचीगणों के समकक्ष के दरोगाओं एवं इंस्पेक्टरों को प्रशिक्षण की अवधि की सैलरी प्रदान किये जाने की अनुमति प्रदान की गयी एवं तत्पश्चात् याचीगणों के समकक्ष के लोगों को ट्रेनिंग के पीरियड की सैलरी प्रदान कर दी गयी है, जबकि याचीगणों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

याचीगणों का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लालबाबू शुक्ला व अन्य के केस में यह विधि की व्यवस्था प्रतिपादित की है कि, ट्रेनिंग का पीरियड जोड़ते हुये प्रमोशनल पे स्केल व वेतनवृद्धि पुलिस कर्मियों को प्रदान की जायेगी। याचीगणों को ट्रेनिंग के पीरियड में स्टाईपेण्ड प्रतिमाह प्रदान किया गया जबकि याचीगणों को ट्रेनिंग के पीरियड की अवधि के पूर्ण वेतन व भत्ते दिये जाने चाहिये थे तथा उनके ट्रेनिंग के पीरियड की अवधि सेवा की अवधि में जोड़े जानी थी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *