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अलीगढ़ में बिना वकील बने महिलाओं ने पहनी अधिवक्ता की ड्रेस, मुकदमा हुआ दर्ज

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: अलीगढ़ जिले में दो महिलाओं द्वारा बिना वकील बने अधिवक्ता की ड्रेस पहनकर न्यायालय में पेश होने की घटना ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इन महिलाओं ने पिछले दो वर्षों से अधिवक्ता की ड्रेस पहनकर जिला और सत्र न्यायालय में कोर्ट रूम में आना-जाना किया, जबकि वे किसी भी राज्य में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत नहीं थीं। इस मामले में अब पुलिस जांच कर रही है और इन महिलाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मुकदमा दर्ज होने की वजह:

13 जनवरी 2025 को थाना बरला के पैरोकार मुनेश कुमार ने अलीगढ़ बार एसोसिएशन के महासचिव दीपक बंसल के माध्यम से दो महिलाओं सोनम राना और नेहा पंडित (उर्फ नितिन उपाध्याय) के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया। इसमें आरोप लगाया गया कि ये महिलाएं बिना किसी पंजीकरण के अधिवक्ता की ड्रेस पहनकर अदालत में पेश हो रही थीं, जो कि कानून के खिलाफ है।

जांच कमेटी का गठन:

इसके बाद, अलीगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए चार सदस्यीय एक जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि सोनम और नेहा, दोनों किसी भी राज्य में पंजीकृत अधिवक्ता नहीं हैं, और उन्होंने जानबूझकर अधिवक्ता की ड्रेस पहनकर अदालत में पेशी दी।

यह जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद, अलीगढ़ बार एसोसिएशन ने इस मामले में कार्रवाई करने का फैसला लिया। इस मामले पर अब पुलिस ने भी अपनी जांच शुरू कर दी है।

कानूनी द्रष्टिकोण:

कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो किसी व्यक्ति को कोर्ट में पेश होने के लिए पहले अपने आप को एक पंजीकृत अधिवक्ता के रूप में स्थापित करना अनिवार्य है। केवल एक पंजीकृत वकील ही अदालत में पेशी के दौरान अधिवक्ता की ड्रेस पहन सकता है। इसके विपरीत, बिना पंजीकरण के अदालत में अधिवक्ता की ड्रेस पहनना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता और सम्मान को भी ठेस पहुँचाता है।

यह मामला एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अदालत के परिसर में बिना उचित अधिकार के किसी भी व्यक्ति का प्रवेश न केवल अन्य वकीलों की प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है, बल्कि यह अदालत की कार्यवाही पर भी असर डाल सकता है।

पुलिस की कार्रवाई:

अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले में हर पहलू की गहराई से जांच की जाएगी, और जो भी कानून के खिलाफ होगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी कहा है कि अगर इन महिलाओं ने जानबूझकर अदालत में प्रवेश किया और ऐसा किया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

क्या कहता है कानून?

भारत के संविधान और न्यायिक प्रणाली के तहत, किसी भी व्यक्ति को न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में काम करने के लिए कानून द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी प्रमाणपत्र के कोर्ट में पेश होना और अधिवक्ता की ड्रेस पहनना सख्त कानून उल्लंघन है। इस तरह की घटनाएं न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाती हैं और नागरिकों के विश्वास को भी कमजोर करती हैं।

निष्कर्ष:

अलीगढ़ में हुए इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं होता। चाहे वह एक आम नागरिक हो या कोई पेशेवर, सभी को अपनी भूमिका निभाने के लिए सही रास्ते का पालन करना चाहिए। अदालतों में पेश होने के लिए हर व्यक्ति को पंजीकरण और उचित प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। यह घटना एक चेतावनी के रूप में सामने आई है कि कोई भी कानून का उल्लंघन करने का प्रयास करेगा, उसे सजा का सामना करना पड़ेगा।

इस तरह के मामलों पर ध्यान देने और सही जानकारी देने से, हम सभी को कानून का सम्मान करना सिख सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया सही तरीके से चले।

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