Bhadohi NewsBreaking NewsIndiaLatestNews

भू-माफिया और राजस्व विभाग के गठजोड़ का परत दर परत खुल रही है पोल

संयम भारत संवाददाता व्यूरो,भदोही। ज्ञानपुर तहसील का भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा एवं राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन के कुछ अधिकारी उसके काले कारनामों को छिपाने में जुटे हैं, जिससे किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जा रोकना मुश्किल हो रहा है। वैसे राज्य सूचना आयोग एवं प्रदेश के आला अधिकारीयों के हस्तक्षेप से भू-माफिया और राजस्व विभाग के गठजोड़ का परत दर परत खुल रही है पोल और वहां से तहसीलदार ज्ञानपुर को स्पष्ट निर्देश दिए कि सात दिनों के भीतर अपीलकर्ता को सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए और की गई कार्यवाही से आयोग को अवगत कराया जाए। समय पर सूचना न देने की स्थिति में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत ₹25,000 का अर्थदंड लगाया जाएगा। आयोग ने तहसीलदार और जन सूचना अधिकारी को दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत उपस्थिति देने का भी आदेश दिया है, ताकि मामले की न्यायिक सुनवाई सुनिश्चित हो सके।सूत्रों के अनुसार, भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा ने जाति बदलकर दलित किसानों की जमीनों पर कब्जा किया है। दिव्यांग दलित मल्लू पुत्र स्वर्गीय शीतला चमार और मनबोध पुत्र स्वर्गीय माता बदल की जमीनों को पासी नाम से दिखाकर हेराफेरी की गई। उच्च न्यायालय, शासनादेश और राजस्व परिषद के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भू-माफिया ने निजी विद्यालयों को सरकारी जमीन देने का प्रयास किया। तहसील प्रशासन द्वारा जानबूझकर सही जानकारी नहीं दिए जाने की वजह से राज्य सूचना आयोग ने सख्त चेतावनी जारी की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।जन सूचना अधिकार के माध्यम से सामने आया कि तहसीलदार और राजस्व विभाग की मिलीभगत से भू-माफिया को संरक्षण मिल रहा है। आयोग की चेतावनी के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया है, लेकिन भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई की अब तक ठोस पहल नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा माफिया सरगना गिरोह के इशारों पर काम कर रहा है और किसानों का उत्पीड़न करके उनकी जमीनें हड़पा रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो कानून का शासन प्रभावित हो सकता है।जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भदोही को भेजे गए प्रार्थना पत्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भू-माफिया और उसके सहयोगियों ने ग्रामसभा की जमीनों पर कब्जा करने के लिए कूटनीति और हेराफेरी का सहारा लिया। मल्लू पुत्र स्वर्गीय शीतला चमार और मनबोध पुत्र स्वर्गीय माता बदल की जमीनों के रिकॉर्ड में बदलाव करके कब्जा किया गया। प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि भू-माफिया और उसके सहयोगियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। राज्य सूचना आयोग की सख्त कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भू-माफिया को बचाना अब आसान नहीं है और तहसील प्रशासन को भी कानून के दायरे में आने की चेतावनी मिल चुकी है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *