ज्ञानपुर का चर्चित प्रकरण: भू-माफिया कमला शंकर के कथित कृत्यों का जल्द होगा पर्दाफाश?
राज्य सूचना आयोग की सख्ती से भदोही जिले में हड़कंप, कमिश्नर मिर्जापुर करेंगे माल अभिलेखागार की जांचभदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील में भूमि हेराफेरी से जुड़े एक चर्चित मामले ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। राज्य सूचना आयोग की कड़ी सख्ती के बाद जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आयोग ने अपर जिलाधिकारी न्यायिक/उप संचालक चकबंदी एवं माल अभिलेखागार प्रभारी को अगली तिथि पर स्वयं उपस्थित होकर सभी अभिलेख पेश करने के निर्देश जारी किए हैं ताकि मामले का निस्तारण किया जा सके।सूत्रों के अनुसार, ग्राम इटहरा, तहसील ज्ञानपुर के कई महत्वपूर्ण भूमि रिकॉर्ड और सरकारी अभिलेखों की जांच के लिए कमिश्नर मिर्जापुर को विशेष रूप से नियुक्त किया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जानकारी उपलब्ध न कराने वाले जनसूचना अधिकारी को सीधे तलब किया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में प्रशासनिक खलबली मची हुई है।स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ज्ञानपुर का चर्चित नाम कमला शंकर मिश्रा, जो कभी लेखपाल रहा था, ने अपने पद का अनुचित लाभ उठाते हुए किसानों की भूमि में हेराफेरी की। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन, पंचायत भवन भूमि, ग्राम समाज की जमीन और तालाब सहित कई सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामले वर्षो से चर्चा में रहे हैं। आरोपों के अनुसार, इसी भूमि पर कई निर्माण कराकर और विद्यालयों की मान्यता प्राप्त कर यह नेटवर्क आगे चलता रहा।बताया जाता है कि लेखपाल पद पर रहते हुए कमला शंकर ने अपने ही गांव में पोस्टिंग लेकर कथित रूप से रिकॉर्ड में बदलाव कराए और कुछ सरकारी एवं निजी भूमि को अन्य नामों से दर्ज करा दिया। ग्रामीणों और पीड़ित किसानों का दावा है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से कई सौ बीघा भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि भूमि हेराफेरी के इन मामलों में माफिया सरगना के साथ सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय लोग भयवश शिकायत करने से बचते थे।इस पूरे प्रकरण को उजागर करने में वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री की भूमिका अहम मानी जा रही है। उनकी सक्रियता के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग सूचना आयोग ने की है, जिससे रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों का खुलासा होने की उम्मीद बढ़ गई है। विशेष रूप से दिव्यांग दलित मल्लू की ज़मीन पर हुए कथित फर्जीवाड़े ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक न्याय की लड़ाई लड़ने के बाद मल्लू का निधन हो गया, लेकिन सूचना आयोग की सख्ती से अब भी उम्मीद बनी है कि उनके परिवार को न्याय मिल सकेगा।जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, जनपद भदोही में यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद कौन-कौन से रिकॉर्ड सामने आते हैं और किस हद तक इन गंभीर आरोपों की पुष्टि हो पाती है।

