ज्ञानपुर में भू-माफिया का आतंक—दिव्यांग दलित की एवं ग्राम सभा की जमीन हड़पने का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
”विशेष संवाददाता संयम भारत, भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र में भू-माफिया द्वारा जमीन कब्जाए जाने का गंभीर मामला इन दिनों सुर्खियों में है। दिव्यांग दलित मल्लू ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव राजस्व, अध्यक्ष राजस्व परिषद, मंडलायुक्त,जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि भू-माफिया गिरोह ने दलित के पूर्वजों की जाति बदलकर सरकारी अभिलेखों में हेरा-फेरी की और उनकी समेत ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया। पीड़ित का कहना है कि स्वर्गीय मनबोध चमार, स्वर्गीय गंगाराम चमार और पूरे परिवार की वास्तविक जाति छिपाकर अभिलेखों में पासी लिख दिया गया, ताकि जमीन पर कब्जा करने का रास्ता आसान बनाया जा सके। वह मांग कर रहे हैं कि परिवार रजिस्टर, कुर्सीनामा, कुटुंब रजिस्टर और वंशावली को सार्वजनिक कर सत्य उजागर किया जाए।पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में ज्ञानपुर तहसील में तैनात एक लेखपाल भू-माफिया का सक्रिय सहयोगी था। उसी ने कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए, जिसके माध्यम से जमीन का नामांतरण गलत तरीके से करवा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जब शिकायत की गई, तो अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच की जगह उसी गिरोह से जुड़े व्यक्ति को जांच सौंप दी। परिणामस्वरूप, जांच रिपोर्ट में मनमाफिक तथ्य जोड़कर प्रकरण को दबाने का प्रयास किया गया। इससे पीड़ित मल्लू को आज तक न्याय नहीं मिल सका है और पूरे क्षेत्र में प्रशासन की इस कार्यवाही को लेकर गहरी नाराजगी व्याप्त है।स्थानीय ग्रामीणों ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा और उसके सहयोगियों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि ग्राम सभा की लगभग बीस बीघा जमीन और अन्य किसानों की संपत्ति में भी भारी गड़बड़ी की आशंका है। ग्राम सभा द्वारा इस मामले में पहले भी उप जिलाधिकारी के यहां मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन दोषियों पर अभी तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों में यह सवाल ज़ोर पकड़ रहा है कि जब मामले में बार-बार अनियमितताएं उजागर हो रही हैं, तो आखिरकार आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में पीड़ित मल्लू ने कहा है कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति द्वारा दिया गया दानपत्र कानूनन मान्य ही नहीं होता, बावजूद इसके कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उनकी जमीन हड़प ली गई। उन्होंने मांग की है कि मनबोध चमार को ‘मलबोध पासी’ बताकर तैयार किए गए सभी रिकॉर्ड तत्काल मंगाकर वंशावली, परिवार रजिस्टर और कुटुंब रजिस्टर की जांच कराई जाए। साथ ही इस अवैध कब्जे को अंजाम देने में सहयोगी रहे लेखपाल, कानूनगो और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।पूरा मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है, जबकि पीड़ित पक्ष लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन अब इस गंभीर मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करेगा, ताकि दिव्यांग दलित मल्लू और उनके परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसे कृत्यों पर रोक लगे। ज्ञानपुर तहसील में फैले भू-माफिया नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए यह मामला अब प्रशासनिक सख्ती की कसौटी बन चुका है।

