हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी कर भू-माफिया पर गंभीर आरोप, दिव्यांग दलित की जमीन हड़पने का मामला तूल पकड़ा
विशेष संवाददाता भदोही, संयम भारत, ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र में एक बार फिर भू-माफिया के कथित गुंडाराज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा ने उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करते हुए दिव्यांग दलित की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया। जबकि डीडीसी के आदेश को हाईकोर्ट द्वारा स्टे किया जा चुका है, इसके बावजूद 41/45 के अभिलेखों में भू-माफिया का नाम दर्ज होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।पीड़ित दिव्यांग दलित मल्लू का आरोप है कि उसके पिता और पूर्वजों की जाति से संबंधित अभिलेखों में कूटरचना कर जमीन हड़प ली गई। जांच में पहले भू-माफिया को निर्दोष दर्शाया गया, जबकि दूसरी रिपोर्ट में एसीओ का हवाला देकर मामले को दबाने की कोशिश की गई। इससे साफ है कि जांच प्रक्रिया में गंभीर विरोधाभास और पक्षपात बरता गया है।बताया जा रहा है कि कमला शंकर मिश्रा पूर्व में ज्ञानपुर तहसील में लेखपाल रह चुका है और उसी दौरान उसने सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर दलित परिवार की जमीन अपने नाम करवा ली। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन लेखपाल और कानूनगो की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिन पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का आरोप है।पीड़ित मल्लू, जो दोनों आंखों से दिव्यांग है, ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भदोही को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। उसने मांग की है कि स्वर्गीय मनबोध चमार, स्वर्गीय गंगाराम चमार एवं उनके परिजनों से जुड़े कुटुंब रजिस्टर, परिवार रजिस्टर, कुर्सीनामा और वंशावली को सार्वजनिक कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।शिकायती पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि चमार और पासी दोनों ही अनुसूचित जाति में आते हैं और ऐसे मामलों में दान पत्र या नामांतरण कानूनन मान्य नहीं हो सकता। इसके बावजूद ग्राम सभा के अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर जमीन का नामांतरण कर दिया गया, जो सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है।इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में भारी रोष है। पीड़ितों ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई, जान-माल की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शासन इस गंभीर आरोपों वाले प्रकरण में क्या कदम उठाता है और क्या दिव्यांग दलित को न्याय मिल पाता है।

