रविवार, मार्च 22, 2026
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मुख्य सचिव के आदेश की अवहेलना, भू-माफिया को संरक्षण! दलित की जमीन हड़पने का गंभीर आरोप, ज्ञानपुर तहसील प्रशासन कटघरे में

विशेष संवाददाता संयम भारत, भदोही, उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव एवं राजस्व परिषद अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भदोही जनपद के विशेष भूमि अधिकारी द्वारा सूचना न दिए जाने के मामले को सूचना आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग की सख्ती के बाद जनपद के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि विशेष भूमि अधिकारी द्वारा जानबूझकर सूचना देने में आनाकानी की जा रही है ताकि भू-माफिया को संरक्षण मिलता रहे।मामला ज्ञानपुर तहसील से जुड़ा है, जहां आरोप है कि तहसील प्रशासन भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा के इशारे पर काम कर रहा है। पीड़ित दिव्यांग दलित मल्लू की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में निष्पक्ष जांच कराने के बजाय, उसी गिरोह से जुड़े हल्का लेखपाल से जांच कराई गई, जिसने कथित तौर पर अपने सरगना के पक्ष में फर्जी रिपोर्ट लगा दी। इससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।जानकारी के अनुसार भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा पूर्व में ज्ञानपुर तहसील में लेखपाल के पद पर तैनात रह चुका है। आरोप है कि उसने सरकारी अभिलेखों में कूटरचना कर पीड़ित दलित परिवार की जाति बदलवाकर जमीन अपने नाम नामांतरण करा ली। इस पूरे प्रकरण में हल्का लेखपाल और कानूनगो की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिन पर माफिया से सांठगांठ के आरोप हैं।पीड़ित दिव्यांग दलित मल्लू ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजकर मांग की है कि संबंधित परिवारों के कुटुंब रजिस्टर, परिवार रजिस्टर, कुर्सीनामा एवं वंशावली को सार्वजनिक कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। पीड़ित का कहना है कि इन्हीं अभिलेखों में हेराफेरी कर उसकी पैतृक जमीन हड़प ली गई है।प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर गोलमाल रिपोर्ट भेजे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ज्ञानपुर तहसील में भू-माफिया का प्रभाव इस कदर बढ़ चुका है कि वही जांच अधिकारी तय कर रहा है और वही रिपोर्ट तैयार करवा रहा है। इससे आम जनता में भारी रोष व्याप्त है।सूचना आयोग की सख्ती के बाद अब यह देखना अहम होगा कि शासन-प्रशासन दोषी अधिकारियों और भू-माफिया के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई करता है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि उन्हें न्याय दिलाने के साथ-साथ जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

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