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चकबंदी विभाग के रिकॉर्ड से खुलेगा सच, ज्ञानपुर के चर्चित भू-माफिया पर गंभीर आरोप

विशेष संवाददाता भदोही, संयम भारत, भदोही जनपद की ज्ञानपुर तहसील में चर्चित भू-माफिया से जुड़े एक मामले में चकबंदी विभाग के दस्तावेज अब कई बड़े खुलासों की ओर इशारा कर रहे हैं। राज्य सूचना आयोग के हस्तक्षेप के बाद 15 वर्षों से गायब फाइल सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में कूटरचना और हेराफेरी कर किसानों एवं ग्राम सभा की जमीनों पर अवैध कब्जा किया गया।प्राप्त जानकारी के अनुसार चकबंदी कार्यालय के रिकॉर्ड की सघन जांच में यह सामने आया है कि एक रिटायर लेखपाल द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। आरोप है कि नामांतरण और आरक्षण की प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर कई बीघा जमीन निजी हितों में दर्ज कराई गई। अब इन सभी कागजातों की जांच शुरू होते ही संबंधित लोगों में खलबली मच गई है।मामले में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश शासनादेश और राजस्व परिषद के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ग्राम सभा की जमीन निजी व्यक्तियों के नाम आरक्षित की गई। एक ही व्यक्ति को अलग-अलग रिपोर्टों में कभी “संत” तो कभी “आरक्षित लाभार्थी” दिखाया गया, जिससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।पीड़ित पक्ष का कहना है कि अनुसूचित जाति के दिव्यांग व्यक्तियों की जाति में कागजी हेरफेर कर उनकी जमीन पर कब्जा किया गया। शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्रों में मांग की है कि कुटुंब रजिस्टर, परिवार रजिस्टर और वंशावली अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।राज्य सूचना आयोग की सख्ती के बाद जैसे-जैसे पुराने रिकॉर्ड सामने आ रहे हैं, पूरे मामले की परतें खुलती जा रही हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पीड़ितों को उम्मीद है कि वर्षों से दबा सच अब सामने आएगा और जिम्मेदारों पर कानून का शिकंजा कसेगा।

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