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भदोही शिक्षा विभाग में भू-माफिया संरक्षण का बड़ा खुलासा!

सूचना आयोग की सख्ती से हड़कंप, 15 दिन में सूचना न देने पर लगेगा ₹25,000 का जुर्माना

भदोही से बड़ी खबर: शिक्षा विभाग और भू-माफिया की सांठगांठ उजागर

विधि संवाददाता संयम भारत, भदोही जिले में बेसिक शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोपों का पहाड़ खड़ा हो गया है। राज्य सूचना आयुक्त द्वारा जारी कड़े निर्देशों के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला उस समय तूल पकड़ गया जब जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाएं विभाग द्वारा न तो उपलब्ध कराई गईं और न ही सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से कोई अधिकारी उपस्थित हुआ। सूचना आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को 15 दिनों के भीतर सभी वंचित सूचनाएं उपलब्ध कराने का अंतिम आदेश दिया है, अन्यथा उन पर धारा 20(1) के अंतर्गत ₹25,000 का अर्थदंड लगाया जाएगा।भदोही के ज्ञानपुर क्षेत्र में रिटायर्ड लेखपाल और कुख्यात भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा पर गंभीर आरोप सामने आए हैं कि उसने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उसी आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग से विद्यालय की मान्यता ले ली। सबसे हैरानी की बात यह है कि विभागीय नियमों के बावजूद—जिनके अनुसार भूमि की रजिस्ट्री जमा किए बिना मान्यता संभव नहीं—भू-माफिया को एक नहीं, बल्कि एक ही कैंपस में तीन-तीन स्कूलों की मान्यता दे दी गई। यह विभाग और माफिया की सांठगांठ की ओर इशारा करता है।अपील की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से प्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन विभाग की ओर से कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। इससे साफ होता है कि विभाग वास्तविक दस्तावेज दिखाने से बच रहा है। यह भी आरोप लगे हैं कि जब शिकायतकर्ता ने बार-बार शिकायत की, तब भी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विभाग भू-माफिया को क्यों बचा रहा है? क्या रिश्वत और दबाव इसका कारण है?कमला शंकर मिश्रा पर यह भी आरोप है कि उसने किसानों की जमीन, पंचायत भवन की जमीन, तालाब और ग्राम समाज की जमीनों पर अवैध कब्जा किया। इतना ही नहीं, दिव्यांग दलित मल्लू की जमीन पर जाति बदलकर कब्जा करने का गंभीर आरोप भी दर्ज है। इन सब अवैध कब्जों के बावजूद शिक्षा विभाग ने बिना जांच-पड़ताल के उसके विद्यालय को मान्यता दे दी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह घोर लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का सीधा प्रमाण है।राज्य सूचना आयुक्त द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि वंचित सूचनाएं उपलब्ध कराकर आयोग को भी अवगत कराना होगा, अन्यथा सख्त कार्रवाई तय है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है—शिक्षकों के उत्पीड़न से लेकर विद्यालय मान्यता तक सब कुछ पैसे और दबाव पर निर्भर है। जनता अब इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रही है।जैसे-जैसे सूचना आयोग का हस्तक्षेप बढ़ रहा है, भू-माफिया और उससे जुड़े अधिकारियों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। अब देखना यह है कि आगामी सुनवाई में शिक्षा विभाग क्या जवाब दाखिल करता है और क्या भू-माफिया नेटवर्क पर नकेल कसी जाएगी। फिलहाल भदोही में इस प्रकरण ने शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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