राज्य सूचना आयुक्त ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को 15 दिवस के अन्दर सूचना देने के लिए दिया कड़ा निर्देश
भू-माफिया को बचा रहा है तहसील प्रशासन एवं शिक्षा विभाग!
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भदोही,राज्य सूचना आयोग को नहीं दे रहे हैं जवाब!
आयोग हुआ सख्त अर्थ दंड लगाने के लिए दिया अंतिम अवसर!
राज्य सूचना आयोग के हस्तक्षेप से मामला गहराया!
भू-माफिया को बचाने में क्यों लगा है तहसील प्रशासन एवं शिक्षा विभाग?
राज्य सूचना आयोग का सख्त निर्देश जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी 15 दिवस के भीतर अपीलार्थी को उपलब्ध करायें सूचना!
राज्य सूचना आयुक्त के सख्त तेवर से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप!
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भदोही, भू-माफिया को बचाने के लिए छिपा रहे हैं जानकारी! भू-माफिया को खुला संरक्षण दे रहा है, शिक्षा विभाग!
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा है कि समय से सूचना न देने पर लगेगा अर्थ दंड !
जन सूचना अधिकार से सामने आया शिक्षा विभाग का काला सच!
शिक्षा विभाग नहीं दे पा रहा हैं जवाब, कैसे दे जब भू-माफिया हाईकोर्ट,शासनादेश एवं राजस्व परिषद से बड़ा हो गया है, शिक्षा विभाग एवं भू-माफिया की गहरी साज़िश?
उच्च न्यायालय इलाहाबाद, शासनादेश,राजस्व परिषद ने सरकारी जमीन किसी प्राइवेट विद्यालयों को देने से मना किया गया है, लेकिन भू-माफिया बन गया सबसे बड़ा गुरु घंटाल.?
भू-माफिया के कारनामे हो रहे हैं सबके सामने!बेसिक शिक्षा विभाग: अंधेर नगरी…….
.सूचना आयोग ने जानकारी मांगी तो भाग खड़े हुए अधिकारी!
भू-माफिया के इशारे पर नाच रहा है शिक्षा विभाग! फसेंगे और नपेंगे बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी!
संयम भारत संवाददाता व्यूरो,भदोही जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अंधेर नगरी चौपट राज वाला राज कायम कर रखा है। बिना रजिस्ट्री जमीन के सरकारी जमीन पर स्कूल की मान्यता देने का मामला अब जोर पकड़ने लगा है। कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जनपद भदोही को राज्य सूचना आयुक्त ने चेतावनी दी है कि यदि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जवाब नहीं दिया गया तो और सूचना नहीं उपलब्ध कराई गई तो अर्थदंड अधिरोपित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में इस समय सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार में गले तक इतना डूबे हुए हैं कि इन्होंने अंधेरगर्दी का साम्राज्य कायम कर रखा है। बार- बार शिकायत किए जाने के बावजूद जब इन लोगों ने कार्रवाई नहीं की तो सूचना का अधिकार के तहत शिकायतकर्ता ने जानकारी मांगी। जानकारी मांगने के बाद सूचना उपलब्ध कराने के बजाय अब शिक्षा विभाग के अधिकारी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। इससे यह जाहिर होता है कि भू माफिया को फर्जी कागजात के आधार पर मान्यता तो दे दी गई लेकिन जो वंचित सूचनाए सूचना आयुक्त द्वारा मांगी जा रही है। उनका जवाब यह नहीं दे पा रहे हैं। इसी वजह से मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए हैं। उल्लेखनीय है कि भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील में संगठित गिरोह चलाने वाला भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा अपनी माफियागर्दी के बल पर पहले इसने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया और फिर उस जमीन पर अपना नाम चढ़वा दिया। इस नामांतरण के आधार पर उसने बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूल की मान्यता ले ली। जबकि शिक्षा विभाग में यह नियम है कि जब तक स्कूल से संबंधित जमीन की रजिस्ट्री का कागजात विभाग में न जमा किया जाए। तब तक उस विद्यालय को मान्यता नहीं दी जा सकती। भू माफिया कमला शंकर मिश्रा ने तहसील के कागजातों में फर्जी हेरा फेरी करके कूटरचित दस्तावेज तैयार किया और नामांतरण की कार्रवाई की। इस फर्जी कागजात को बेसिक शिक्षा विभाग में जमा करके इसने विद्यालय चलाने की मान्यता ले ली। यही नहीं अवैध रूप से कब्जा की गई सरकारी जमीन पर इसने एक ही कैंपस में तीन-तीन विद्यालयों की मान्यता ले रखी है। बेसिक शिक्षा विभाग में जब इस बात की शिकायत की गई तो भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में डूबे हुए विभाग के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इनको यह लगता है कि यह जो चाहेंगे, वही होगा। रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के बल पर फर्जी कागजात के आधार पर मान्यता दिए जाने का मामला अब राज्य सूचना आयुक्त के सामने पहुंच चुका है। अपीलकर्ता की ओर से उनके प्रतिनिधि उपस्थित हुए, और विपक्षी जन सूचना अधिकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी जनपद भदोही की ओर से उनके प्रतिनिधि सूर्यमणि शुक्ला उपस्थित हुआ। लेकिन जन सूचना अधिकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी जनपद भदोही ने अभी तक सही सूचनाओं को नहीं उपलब्ध कराया है। अपीलार्थी बनाम जन सूचना अधिकारी कार्यालय बेसिक शिक्षा अधिकारी जनपद भदोही के बारे मे राज्य सूचना आयुक्त ने न्याय हित में आदेश देते हुए कहा है कि जन सूचना अधिकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी जनपद भदोही को इस आशय की नोटिस निर्गत की जाए कि अपीलकर्ता को वंचित सूचनाओं को 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। एवं कृत कार्रवाई से आयुक्त को भी अवगत कराए। अन्यथा उनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (एक) के अंतर्गत रुपए ₹25000 का अर्थ दंड दिया जाएगा। वाद सुनवाई के लिए दिनांक 28. 10. 2025 को तारीख नियत की गई है। गत 25 अगस्त 2025 को दिए गए इस आदेश में राज्य सूचना आयुक्त ने जो कहा है। उससे यह स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के तहत कार्यरत बेसिक शिक्षा विभाग भदोही के अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इन्होंने ऐसे ऐसे विद्यालयों को मान्यता दे दी है जिनके पास उन विद्यालयों की जमीन के कागजात ही नहीं है। ज्ञातव्य है कि जेल में बंद शातिर माफिया के गिरोह का सक्रिय सदस्य भू माफिया कमला शंकर मिश्रा और इसके गिरोह के सदसयों का बहुत बड़ा गिरोह जनपद में बना रखा है। इन लोगों ने अपनी गिरोहबंदी के बल पर दर्जनों किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया है। यही नहीं दिव्यांग दलित मल्लू की जमीन पर इन्होंने जाति बदलकर अवैध कब्जा कर लिया। इसके अलावा तालाब की जमीन, ग्राम समाज की जमीन, पंचायत भवन की जमीन से लेकर जितनी भी आसपास की सरकारी जमीन है। उन जमीनों पर इन्होंने अवैध कब्जा कर रखा है। इन सब मामले की शाशन द्वारा जांच की जा रही है। इस दौरान यह पता चला कि इस भू माफिया ने बगैर जमीन की रजिस्ट्री का कागजात जमा किए बगैर विद्यालय की मान्यता ले ली। अधिकारियों ने मान्यता कैसे दे दिया? एक बहुत जांच का विषय है! बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार इस समय चरम सीमा पर है। ट्रांसफर पोस्टिंग के अलावा शिक्षकों का बहुत बड़े पैमाने पर यहां उत्पीड़न किया जा रहा है। शिक्षकों के उत्पीड़न के साथ ही विद्यालयों को मान्यता दिए जाने के मामले में मनमानी तरीके से रिश्वत के बल पर मान्यता ले ली है। भू माफिया कमला शंकर मिश्रा के विद्यालय को मान्यता दिए जाने से स्पष्ट हो गया है कि बेसिक शिक्षा विभाग माफियाओं के इशारे पर चल रहा है और रिश्वत देकर यहां कैसा भी उल्टा सीधा काम कराया जा सकता है। लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि वह इस मामले की जांच कराए। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में जो भ्रष्टाचार व्याप्त है। अगर उसे भ्रष्टाचार में लिप्त भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों का कानून व्यवस्था के ऊपर से विश्वास उठ जाएगा। अधिकारियों की मनमानी के चलते शिक्षा विभाग की साख चौपट हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग में यही नहीं कई और अन्य विद्यालयों को इसी तरह मानता दे रखी है। जिन विद्यालयों के पास उनके भूमि का कागज नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह माफिया कमला शंकर मिश्रा ने पंचायत भवन की जमीन पर अवैध कब्जा किया और जिस विद्यालय की उसने मान्यता ली है। उस विद्यालय के नाम से कोई जमीन नहीं है। जब विद्यालय के नाम से कोई जमीन ही नहीं है। तो शिक्षा विभाग में उसे मान्यता कैसे दे दी? सबसे गंभीर जांच का विषय यही है। अब देखना है सूचना आयुक्त कार्यालय के समक्ष बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी क्या जवाब दाखिल करेंगे!

