मनरेगा पर सरकार के नए बदलाव से मजदूरों में नाराज़गी, कांग्रेस KCC के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजकुमार तिवारी ने खोला मोर्चा!”
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विशेष संवाददाता संयम भारत, सरकार द्वारा मनरेगा के ढांचे में बड़े बदलाव और इसे नई योजना में बदलने के निर्णय ने उत्तर प्रदेश सहित देशभर के मजदूरों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। ग्रामीण भारत की जीवनरेखा माने जाने वाले मनरेगा के अधिकार-आधारित स्वरूप को कमजोर कर नई व्यवस्था लागू किए जाने पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मजदूर संगठनों का कहना है कि इस बदलाव से उन्हें काम और रोजगार की गारंटी पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।कांग्रेस KCC के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजकुमार तिवारी ने मनरेगा में किए जा रहे परिवर्तनों को मजदूर-विरोधी बताते हुए सरकार के निर्णय पर खुलकर हमला बोला है। उन्होंने हाल में कई जिलों के मजदूरों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएँ सुनीं और स्पष्ट कहा कि मनरेगा को खत्म करना संवेदनहीनता और तानाशाही का उदाहरण है। डॉ. तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के अधिकार को खत्म करके मनरेगा को सिर्फ एक नाममात्र की वेलफेयर स्कीम में बदलना चाहती है, जिससे मजदूरों की आजीविका पर सीधी चोट पड़ेगी।विपक्ष का कहना है कि मनरेगा को नई योजना में बदलकर मजदूरों को उनके सुरक्षित अधिकार, राइट टू वर्क, से वंचित किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने इस कदम को ‘मनरेगा कमजोर करने की साज़िश’ करार देते हुए दावा किया है कि बजट में कटौती और संरचना बदलने का मकसद धीरे-धीरे मनरेगा को समाप्त करना है। वहीं सरकार का तर्क है कि नई योजना पारदर्शिता लाएगी और तकनीकी निगरानी से भ्रष्टाचार कम होगा, लेकिन विपक्ष इसे एक भ्रमक दलील बता रहा है।डॉ. राजकुमार तिवारी ने मजदूरों को आश्वस्त किया है कि कांग्रेस KCC उनके हक़ की लड़ाई सड़कों से लेकर संवैधानिक मंचों तक लड़ेगी। उन्होंने कहा कि मजदूरों की आवाज़ को किसी भी कीमत पर दबने नहीं दिया जाएगा और जल्द ही प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। कांग्रेस इकाइयाँ पहले ही ब्लॉक और जिला स्तर पर जनसंपर्क अभियान शुरू कर चुकी हैं, जिससे मजदूरों में उम्मीद जगी है कि उनके अधिकारों की लड़ाई मजबूत तरीके से आगे बढ़ेगी।

