एंटी करप्शन: क्यों नहीं पकड़े जाते शातिर अपराधी?
पीडीए में हुई कार्रवाई से एंटी करप्शन टीम पर सवालिया निशान!हेराफेरी के आरोपी भू-माफिया के खिलाफ कब होगी एंटी करप्शन टीम की कार्यवाही? संयम भारत संवाददाता प्रयागराज। छोटे-मोटे लिपिक लेखपाल आदि को रंगे हाथों रिश्वत लेकर पकड़ने मे माहिर थाना एंटी करप्शन की टीम की कार्रवाई को लेकर लोगों में तरह-तरह के सवाल उत्पन्न हो रहे हैं! आम जनता में यह चर्चा है कि बड़े-बड़े भू माफिया पुलिस थानों में तैनात इंस्पेक्टर और निरीक्षक हर महीने लाखों करोड़ों रुपए की हफ्ता वसूली करते हैं। इन अपराधियों के खिलाफ थाना एंटी करप्शन टीम कार्रवाई क्यों नहीं करती है? अभी पिछले दिनों प्रयागराज विकास प्राधिकरण में एक लिपिक को ₹8000 रिश्वत लेते हुए पुलिस टीम थाना एंटी करप्शन की टीम ने पकड़ा था। इस मामले में प्रयागराज विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों का कहना है कि थाना एंटी करप्शन की टीम ने बड़े ही अमानवीय ढंग से कार्रवाई की। न तो किसी को अपना उन लोगों ने परिचय पत्र दिखाया और न ही मामले की तहकीकात की। बस केवल पहुंचे और क्लर्क को पकड़कर घसीट कर ले जाने लगे। इससे कर्मचारियों में भारी डर फैल गया कि यह लोग कहीं किसी माफिया गैंग के लोग तो नहीं है? जो कर्मचारी को पीट रहे हैं? क्योंकि पीडीए कार्यालय में कई बार इस तरह की मारपीट की घटनाएं हो चुकी है। जब बाहरी लोगो ने कार्यालय में घुसकर अभियंता व अधिकारियों को पीट कर अपना काम करने की कोशिश की थी। जिन लोगों का अवैध निर्माण हटा दिया जाता है। आक्रोश में आकर के वे लोग भी पीडीए कार्यालय में आकर मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं। इस वजह से प्रयागराज विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों को यह गलतफहमी हुई कि टीम के लोग किसी माफिया की ओर से तो नहीं है। क्योंकि उन लोगों ने न तो अपना परिचय पत्र दिखाया और न ही कार्यालय में मौजूद उच्च अधिकारियों से संपर्क किया। सीधे पकडा और घसीट कर ले जाने लगे। पीट कर लहूलहान कर दिया। जबकि वह भी एक सरकारी कर्मचारी है। रजिस्ट्रेशन करने के लिए अन्य कागजात तथा जो खर्च होते हैं। उसकी छानबीन किए बिना सीधे हमला बोलकर जिस तरह की कार्रवाई की गई। इससे एंटी करप्शन टीम की कार्यशैली पर कई तरह की सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं? जो बड़े-बड़े भू माफिया हैं। भूमाफियाओं को पकड़ने के लिए टीम के लोग कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं? वहां क्यों नहीं जाल बिछाते हैं? एसटीएफ का एक सिपाही देखते ही देते 50 करोड़ की बिल्डिंग बनवा लेता है। हजारों करोड रुपए का कफ सिरप घोटाला कर देता है। ऐसे लोग थाना एंटी करप्शन टीम की नजर में क्यों नहीं आते हैं? इस मामले का एक जीता जागता नमूना यह भी है कि पिछले दिनों भदोही जनपद के ज्ञानपुर तहसील का एक चर्चित भू-माफिया पूर्व लेखपाल कमला शंकर मिश्रा के खिलाफ दिव्यांग दलित की शिकायत की और कई बार उसने लोगों से अनुचित लाभ लेकर नाजायज काम किया। लोगों ने पुलिस के अधिकारियों से कई बार भू-माफिया कमला शंकर की हेरा-फेरी की जिसकी शिकायत की गई। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि विभाग के कुछ लोगों ने भू-माफिया कमला शंकर मिश्र को सूचित कर दिया जिससे वह नहीं पकड़ा गया। जबकि उसके खिलाफ तमाम ऐसे मामले हैं। उसके कार्यकाल में उसके द्वारा जो पत्रावलियां, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर कर लोगों की जमीन इधर से उधर की गई है। एंटी करप्शन के लोग अगर इस मामले की जांच करें, तो कमला शंकर मिश्रा की हेरा-फेरी और भ्रष्टाचार के काले कारनामों का पर्दाफाश हो सकता है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि छोटे-मोटे लोगों को पड़कर टीम के लोग आए दिन कभी-कभी यह बता देते हैं कि इनका विभाग कार्यरत है। लेकिन जो बड़े-बड़े भू माफिया है। जो लोगों की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। अनुचित लाभ लेकर गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार का तांडव कर रहे हैं। ऐसे माफियाओं के खिलाफ एंटी करप्शन टीम एंटी करप्शन बिजनेस टीम कार्रवाई क्यों नहीं करती है? प्रयागराज विकास प्राधिकरण की घटना को लेकर के टीम की कार्यशैली संदेह के घेरे में है!

