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सूचना न देने पर CDO पर अर्थदंड की चेतावनी, भदोही में भू-माफिया का आतंक और कानून व्यवस्था पर उठते सवाल

विशेष संवाददाता भदोही, संयम भारत, भदोही जनपद में भू-माफियाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। राज्य सूचना आयुक्त ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध न कराने पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) भदोही को अर्थदंड लगाने की चेतावनी दी है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा द्वारा कब्जा की गई जमीनों और उन पर संचालित कथित अवैध स्कूलों से संबंधित समस्त सूचनाएं निर्धारित समय में उपलब्ध कराई जाएं, अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी।आरोप है कि भू-माफिया के इशारे पर सूचना आयोग को जानबूझकर जानकारी नहीं दी जा रही है। ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र में किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जे और विरोध करने वालों को धमकाने का सिलसिला लंबे समय से जारी है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। सूचना आयुक्त की सख्ती के बाद प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किन कारणों से सूचनाएं रोकी जा रही हैं।इसी बीच भदोही में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत जान देकर चुकाने का मामला भी सामने आया। धसकरी गांव में ग्राम प्रधान के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की शिकायत करने वाले मेडिकल स्टोर संचालक कमलाकांत दुबे की आर्टिगा कार से कुचलकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी ग्राम प्रधान समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी कार्रवाई ऐसे जघन्य अपराधों के लिए पर्याप्त है।प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई जा रही है। प्रयागराज में पत्रकार एल.एन. सिंह उर्फ पप्पू की हत्या के बाद भदोही में भी पत्रकारों पर जानलेवा हमले का खतरा मंडरा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने आरोप लगाया है कि भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा के खिलाफ लगातार समाचार प्रकाशित करने के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। सम्मानित नागरिकों ने मुख्यमंत्री और प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर उनकी सुरक्षा की मांग की है।इन घटनाओं ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और माफिया राज को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई और “बुलडोजर नीति” की चर्चा के बीच आम जनता यह पूछ रही है कि आखिर ऐसे भू-माफियाओं और दबंगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी। भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले पत्रकारों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

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