इटहरा में हाईकोर्ट आदेश की अनदेखी! प्रशासन की हीला-हवाली से ग्रामवासी नाराज़“इटहरा की जमीन पर कब्ज़ा…
हाईकोर्ट का आदेश हवा में! प्रशासन कब जागेगा?”“
भू-माफिया के कब्ज़े पर प्रशासन मौन — हाईकोर्ट ने कहा, 90 दिन में हटाओ, लेकिन कार्रवाई शून्य!”“
ग्राम सभा बनाम भू-माफिया: इटहरा में हाईकोर्ट आदेश का पालन कौन करेगा?”“
डीएम से लेकर एसडीएम तक पत्र… पर कब्ज़ा जस का तस! ग्रामवासियों की न्याय पुकार तेज़।
”विशेष संवाददाता भदोही, संयम भारत, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रदेश में सभी सरकारी जमीनों से 90 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद, भदोही जनपद की ज्ञानपुर तहसील के ग्राम इटहरा में आदेश का पालन होते नहीं दिख रहा है। स्थानीय प्रशासन की हीला-हवाली से ग्रामवासी बेहद नाराज़ हैं। हाईकोर्ट के साफ निर्देशों के बाद भी भू-माफिया कमला शंकर मिश्रा के अवैध कब्ज़े पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामवासियों ने अतिक्रमण हटवाने के लिए उप जिलाधिकारी, जिला प्रशासन और प्रदेश स्तर के अधिकारियों तक पत्र भेजे हैं, लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया। ग्राम सभा पहले ही भू-माफिया के खिलाफ उपजिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल कर चुकी है, परंतु मुकदमे में कोई अग्रिम कार्यवाही न होने से ग्रामीणों में रोष बढ़ता जा रहा है।हाईकोर्ट ने हाल ही में पारित आदेश में कहा कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने में लापरवाही बरतने वाले लेखपाल, राजस्व अधिकारी और तहसीलदार के खिलाफ विभागीय व आपराधिक कार्रवाई की जाए। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण होने पर हर्जाना लगाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि सड़क और सार्वजनिक स्थल किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज की जीवन रेखा हैं, जिन पर कब्ज़ा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत संपत्ति का संरक्षक है, इसलिए यदि वह भू-माफिया के विरुद्ध समय पर सूचना नहीं देता, तो डीएम द्वारा उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यहां बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम सभा स्वयं मामले को लेकर सक्रिय है, तब प्रधान किसके खिलाफ कार्रवाई करे, और प्रशासनिक तंत्र आखिर क्यों चुप है?ग्राम इटहरा में भू-माफिया द्वारा किए गए अवैध कब्ज़े को हटाने की जिम्मेदारी किसकी है, यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने साफ कहा था कि यदि 90 दिनों में कार्रवाई नहीं होती, तो यह अधिकारियों की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।ग्रामवासी अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाएगा। लेकिन जब तक जिम्मेदार अधिकारी अपनी भूमिका नहीं निभाएंगे, तब तक ग्राम सभा की जमीन भू-माफिया के कब्ज़े से मुक्त होने की संभावना बेहद कम दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि कानून सबके लिए समान है, और यदि कोर्ट का आदेश भी लागू न हो पाए, तो न्याय की उम्मीद किससे करें?

