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हिन्दू जन जागरण के क्रम में सकल हिन्दू समाज के द्वारा आयोजित हुआ हिन्दू सम्मेलन

संयम भारत संवाददाता प्रयागराज।हिन्दू जन जागरण के क्रम में सकल हिन्दू समाज के द्वारा आयोजित हिन्दू सम्मेलन का आयोजन अम्बेडकर बस्ती मोहत्सिमगंज प्रयागराज में किया गया।जिसमें कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विजय अधिवक्ता उच्च न्यायालय ने अपने उद्बोधन में कहा प्रभु श्री राम के बुराई पर अच्छाई पर विजय रावण के भाई विभीषण द्वारा धर्म का मार्ग चुनने और प्रभु श्री राम द्वारा रावण से संसार को मुक्ति , विजय के बाद प्रभु श्री राम से कहा गया राजगद्दी संभाले बाल्मीकि रामायण में कहा गया है उन्होंने कहा नहीं भरत मेरी राह देख रहा होगा मेरी मातृभूमि, जननी जन्मभूमिष्य स्वर्गादपि गरीऐसीधर्म की स्थापना के लिए गीता में कहा गया है यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌ ॥ जो भी धर्म के लिए कार्य करता है वह ईश्वरीय कार्य होता है वह अपने भारत माता को सर्वोपरि मानते हैं मां भारती का जो भाल है वह सदैव गर्व के साथ दमदमाता रहे और कोई दूसरी अभिलाषा नहीं है इस बात को समझते हुए हमें अपने दायित्व का निर्धारण जहां जहां पर जिस स्थिति में है वहीं से करना होगा ।विचार करना होगा । आज आपके सामने तीन मुख्य चुनौतियां हैं जिसके प्रति हमें जागना होगा। पहली चुनौती है धर्मांतरण हमारी बस्तियों में लोग पैसा लेकर एजेंट घूम रहे हैं पैसा लेकर धर्मांतरण करवाया जा रहा है बताइए जब इस तरह से निरंतर कटते-कटते घटते घटते हम एक दिन कहां पहुंचेंगे कल्पना करके ही सोच लीजिए जो भविष्य के सपने हम देख रहे हैं अपने आगे आने वाली पीढ़ी के लिए वह तो मिट्टी में मिलेंगे कि नहीं मिलेंगे ?सारे सपने व्यर्थ जाएंगे कि नहीं जाएंगे? आपका आज का वर्तमान का परिश्रम किस दिन काम आएगा इसलिए हम बड़े भाग्यशाली हैं कि इस कालखंड में जी रहे हैं हमें अपने कर्तव्य का निर्वहन इसलिए भी करना चाहिए कि हमारी अगली आगे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे संवर्धित रहे अपने त्योहारों को निर्विघ्न रूप से बना पावें। तो पहले जो समस्या है धर्मांतरण की तो, हमें अपने आस पड़ोस कहीं धर्मांतरण हो रहा है तो हमें उसके लिए सावधान होना पड़ेगा क्योंकि बटेंगे तो कटेंगे निश्चित रूप से यह मैं नहीं कह रहा हूं यह डा बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने जब हिंदू धर्म छोड़ा था किसी अन्य धर्म को उन्होंने स्वीकार नहीं किया था बौद्ध धर्म को स्वीकार किया था बौद्ध धर्म सनातन धर्म ही है उससे कहीं भिन्न नहीं है आप छोटी सी कोई पूजा करें बड़ी पूजा करें पंडित जी कहते हैं बौद्धावतारे वर्तमाने भगवान बुद्ध नारायण है इसलिए अपने कर्तव्य का निर्धारण करना पड़ेगा दूसरी चुनौती है घुसपैठ हमारे संस्कृति संसाधन आर्थिक सामाजिक चीजों को नष्ट करने के लिए प्रयास किया गया उसके लिए हमें सावधान रहना पड़ेगा l कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आत्मचार्य डॉ कृष्ण योग गुरु विश्व योग परिषद ने अपने उद्बोधन में कहा गया जो भी व्यक्ति जिस भी कार्य में जुड़ता है वह सेवा भाव से जोड़ता है अपने कार्य को ही पूजा मानता है धर्म के प्रत्येक कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य जन जागरण ही है कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे होटल व्यवसायी ज्ञानेश ने कहा हम अपनी व्यवसाय के माध्यम से बाहर से आए हुए लोगों को विरासत संस्कृति के प्रतीक को दिखाने और बताने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है lकार्यक्रम उपस्थित प्रमुख मातृ शक्ति के रूप में अध्यापिका नीलू जी ने कहा कि महिलाएं सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है कार्यक्रम का संचालन सतीश ने किया l*कार्यक्रम का समापन भारत मां की आरती के साथ हुआ था उपस्थित प्रमुख लोगों में मनोज, सतीश,अंबेडकर बस्ती के स्थानीय लोग उपस्थित रहें।

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