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बाबा नीब करोरी महाराज -अंतरराष्ट्रीय ख्याति, प्राप्त दिव्य अलौकिक शक्तियों से परिपूर्ण संत

द्विजेंद्र मोहन शर्मा/संयम भारत

बाबा नीब करोरी महाराज -अंतरराष्ट्रीय ख्याति
प्राप्त दिव्य अलौकिक शक्तियों से परिपूर्ण संत जो कलयुग के संकट हारी हनुमान के अनन्य भक्त थे । ऐसे अवतारी विभूति का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद के टूंडला तहसील के ग्राम अकबरपुर में हुआ था। गांव अकबरपुर में पंडित ज्ञानचंद शर्मा के संपन्न जमींदार परिवार में पंडित दुर्गादास शर्मा और कौशल्या देवी के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में विक्रम संवत 1957 मार्गशीष शुक्ल पक्ष की अष्टमी { 30 नवंबर वर्ष 1900) की शुभ घड़ी में बाबा का जन्म हुआ था। नवजात बालक ‌का परिवार मे नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा रखा गया। इनके एक छोटे भाई केशव शर्मा थे ।
महाराज बचपन से ही धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के रहे परिवार के द्वारा 11 वर्ष की आयु में ही उनकी शादी आगरा के बादाम गांव निवासी पंडित रेवती राम शर्मा की पुत्री राम बेटी शर्मा के साथ कर दी गई। कालांतर में दो पुत्र अनेक सिंह शर्मा जो मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा में तथा पंडित धर्म नारायण शर्मा उत्तर प्रदेश वन विभाग मे सेवारत रहे। आपकी एक धर्म परायण पुत्री गिरिजा देवी भटेले है जिनके पति जगदीश प्रसाद भटेले जो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया बोकारो में अधिकारी रहे। बड़े पुत्र स्वर्गीय अनेक सिंह के एक पुत्र डॉक्टर धनंजय शर्मा तथा पुत्री शशि शर्मा है। वही स्वर्गीय धर्म नारायण शर्मा जी के 6 पुत्रियां सुनीला शर्मा, अर्चना शर्मा,वंदना शर्मा, भावना शर्मा,रितु शर्मा तथा रिचा शर्मा है। शादी के कुछ समय बाद ही आप घर छोड़कर बवानिया गुजरात में तपस्या के लिए चले गए वहां तालाब में खड़े होकर कई वर्ष तपस्या की वहां पर बाबा जी का आश्रम स्थापित है बवानिया में तलैया बाबा के नाम से आप ने लोगों का कल्याण करके ख्याति प्राप्त की ‌अचानक बवानिया से वापस चले आए लक्ष्मी नारायण शर्मा कुछ समय परिवार में रहने के बाद तीसरी दशक में बाबा जनपद फर्रुखाबाद की नीब करोरी गांव में पहुंच कर भूमिगत साधना मे कई वर्षों तक समाधिस्थ रहे। जहां से बाबा की अलौकिक और दिव्य शक्तियों के प्रभाव से काफी लोग बाबा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचने लगे। वहीं से बाबा का नाम लक्ष्मण प्रसाद से नींव करोरी बाबा हो गया। नीव करोरी वावा की अलौकिक दिव्य शक्ति की घटना काफी प्रचलित है बाबा लक्ष्मण दास प्रायः गंगा स्नान के लिए फर्रुखाबाद ट्रेन से जाया करते थे एक बार टी टी ने टिकट न होने पर बाबा को ट्रेन से नीचे उतार दिया। बाबा नीचे उत्तर कर एक पेड़ के नीचे बैठ गए। फिर ड्राइवर ने ट्रेन चलाने का प्रयास किया ट्रेन काफी प्रयास के बाद नहीं चली फिर हार कर अन्य यात्रियों ने बाबा की दिव्य शक्तियों के संबंध में ज्ञात कराया तो टी टी ने क्षमा मांग कर बाबा को पुनः ट्रेन में बैठाया तब ट्रेन आगे बढ़ सकी। बाद में रेल मंत्रालय द्वारा उस स्थान पर बाबा के नाम से स्टेशन बना दिया गया।‌
नीब करोरी से बाबा अचानक उत्तराखंड के लिए प्रस्थान कर गये चौथे दशक में उन्होंने वहां अपनी दिव्य और अलौकिक शक्तियों से जन कल्याण कर लोगों के कष्टों को दूर किया गया। उत्तराखंड में अभी बाबा की ख्याति काफी फैल चुकी थी । बाबा जी हमेशा प्रसन्न मुद्रा में केवल ‌एक कंबल में हल्द्वानी के हनुमान मंदिर में विराजमान रहते थे वहीं से आसपास भ्रमण कर भक्तों के कष्टों को दूर करने का काम करते थे। फिर बाबा को कुछ लोग कंबल बाबा के नाम से भी पहचानने लगे । हल्द्वानी के एक डॉक्टर निर्मल मोगली जो बाबा के 125 में कार्यक्रम में कनाडा से पहुंचे हुए हैं उन्होंने खुद ही बताया की बाबा ने ही उनको जीवन दिया है। डॉक्टर मोगली के मुताबिक वर्ष 1952 में जब उनका जन्म नैनीताल में हुआ था तो जन्म के समय है वह पूरी तरह मरणासन्न स्थिति में थे किंतु बाबा ने अचानक स्वयं घर पर पहुंच कर उन्हें अपने गोदी में रखकर आशीर्वाद देते हुए जीवन दान दिया बाबा की कृपा से अचानक चिल्लाने और श्वास लेने लगे थे अन्यथा परिवार के लोगों ने मृत मानकर कर उनको कपड़े में लपेटकर एक तरफ रख दिया था। उनके द्वारा बाबा की चमत्कारी और अलौकिक शक्तियों के प्रभाव के अन्य संस्मरण सुनाये गये। उत्तराखंड में रहते हुए वावा नीब करौरी महाराज ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हुए पूज्य संत सोमवारी महाराज के साधना स्थल पर हनुमान मंदिर स्थापना का निर्णय लिया गया। जिसकी स्थापना वर्ष 1960 में उनके द्वारा की गई। वावा ने वर्षों तक साधना कर जन कल्याण के लिए अपने शक्तियों का उपयोग किया क्षेत्र में भ्रमण कर बाबा ने भूमियाधर, काकरी हनुमानगढ़ी में भी हनुमान मंदिरों की स्थापना कराई बाबा के भक्तों को उस स्थान पर शाश्वत आध्यात्मिक ऊर्जा का आभास होता है।
एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग जब परेशान हालत में बाबा की ख्याति सुनकर कैंची धाम पहुंचे थे उन्होंने भी बाबा का आशीर्वाद लिया जो आज विश्व में उच्च शिखर पर हैं। महाराज जी की दिव्य शक्तियों से प्रभावित होकर नैनीताल की इंडिया होटल के मालिक के परिवार की धर्म परायण आध्यात्मिक महिला घर परिवार छोड़ कर कैंची धाम आ गई और अंत समय तक बाबा की सेवा मे आश्रम में सिद्धि मां के रूप में रही । सिद्धि मां के द्वारा ही बाबा की महा समाधि के बाद नीब करोरी फर्रुखाबाद में उनकी भूमिगत गुफा और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।
1967 मे बाबा ने वृंदावन आश्रम में आकर हनुमान मंदिर की स्थापना कराई। काफी भ्रमण कर भक्तों के कष्टो का निवारण और कल्याण करने के बाद वावा ने 11 सितंबर 1973 अन्त चतुर्दशी के दिन माहा समाधि ली।
महाराज की महा समाधि के बाद उनके धर्मपत्नी राम बेटी द्वारा आश्रम की सकुशल संचालन के लिए एक ठाकुर हनुमान टेस्ट की स्थापना की गई। वर्तमान में महाराज की पुत्री गिरिजा देवी भटेले के निर्देशन में यह ट्रस्ट डॉक्टर धनंजय शर्मा संदीप भटेले‌ संजय गुप्ता त्रिलोक चंद शर्मा आदि की विशेष सक्रियता और कर्तव्य निष्ठा के साथ सुचारू संचालित है। गिरिजा देवी के अनुसार बाबा का जीवन मानव जाति के कल्याण के लिए समर्पित्र रहा विशेष रूप से दीन दुखी उनकी कृपा के पात्र होते थे। उनके स्मरण मात्र से ही भक्तों के दुखों का कल्याण होता है। वर्तमान में बाबा के अमेरिका के न्यू मैक्सिको जर्मनी के ताऊस बाबा के आश्रम बने हुए इसके अलावा अनेक स्थानों पर मंदिर भी हैं विशेष रूप से नीव करोरी ,फर्रुखाबाद ,वृंदावन धाम विंध्याचल,बावानिया कैंची धाम, शिमला दिल्ली, लखनऊ के अलावा जयपुर जबलपुर अलीगढ़ पिथौरागढ़ हरदोई मुंबई आदि स्थान पर मंदिरों के अलावा नर्मदा किनारे भी एक आश्रम की स्थापना बाबा के भक्तों द्वारा की गई है। गिरिजा देवी के द्वारा बाबा की सार्वभौमिकता के विषय में संस्मरण सुनाते हुए बताया गया जब उनकी शादी हुई थी तो गांव में बाबा के द्वारा उनका कन्यादान किया जा रहा था उसी समय कैंची धाम के भक्तों द्वारा बताया गया कि बाबा कैंची धाम में भी साक्षात मौजूद थे। बाबा की ऐसी दिव्य अलौकिक शक्तियों के अनेक संस्मरण है बाबा स्वयं में एक अदृश्य देवीय शक्ति संजोय हुए अध्यात्म से ओतप्रोत अनंत प्रेम की प्रति रूप थे। दिव्य अलौकिक शक्ति के अवतरण दिवस पर उनको शत-शत नमन ‌ -वंदन।

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